परिसर में ग्रामीण बांध रहे मवेशियां
11 साल के बाद भी शहीद के नाम पर गांव का नामकरण हुआ और ना ही मेले का आयोजन
कृष्णकांत दौहरे जामली
सीहोर, इछावर। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूत की स्मारक उपेक्षा और अनदेखी के कारण बदहाल स्थिति में है। पार्क के नाम पर परिसर में खरपतवार और कुछ कटीली झाड़ियां खड़ी है।
स्मारक परिसर का मेन गेट रस्सी से बंधा है जिसे ग्रामीण आसानी से खोलकर उसमें अपनी मवेशियां बांध रहे हैं। हम बात कर रहे हैं क्षेत्र के वीर सपूत ओमप्रकाश मर्दानियां के गांव शाहपुरा स्थित शहीद स्मारक की। जो सरकार और नेताओं द्वारा शहीद के सम्मान में किए गए वादों और दावों की पोल खोल रही है। पिछले महीने शहीद मर्दानिया की 10वीं पुण्यतिथि थी।
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11 साल के बाद भी शहीद के नाम पर गांव का न तो नामकरण हुआ और ना ही मेले का आयोजन। वहीं तहसील में शहीद मर्दानिया के नाम पर कोई कार्य योजना भी नहीं है। गांव शाहपुरा आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। तहसील क्षेत्र के गांव शाहपुरा के वीर सपूत ओमप्रकाश मर्दानिया 13 मार्च 2013 को श्रीनगर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
15 मार्च को जब शहीद मर्दानियां को पार्थिव शरीर गांव लाया गया था, तब तात्कालिक मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, सांसद स्वर्गीय सुशमा स्वराज सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता, कलेक्टर कवींद्र कियावत और दूर दराज गांव से ग्रामीण शहीद को श्रद्धांजलि देने गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि उस दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शहीद के सम्मान में स्मारक का निर्माण, शहीद के नाम पर गांव का नामकरण, मेले का आयोजन सहित कई घोषणाएं की थी, लेकिन 11 साल के बाद भी शहीद के नाम पर गांव का नामकरण हुआ और ना ही मेले का आयोजन। यहां तक कि गांव में अराज भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
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बदहाल है शहीद स्माकरः उचित देखरेख के अभाव में शहीद स्मारक जर्जर हालत में है। स्मारक में लगें टाइल्स उखड़ रहे है, फर्स के पेवर्स भी कई जगह से टूटने फूटने के साथ ही रेत के वाहनों के आवागमन से दब गए है। इतना ही नहीं परिसर में पार्क के स्थान पर खरपतवार और कटीली झाड़यिा खड़ी है। कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर इसमें घांस भूसा रखने के साथ ही मवेशियां बांधी जा रही है। लेकिन कोई भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
फाइलों में दबी सरकार की घोषणाएं क्षेत्र के समाजसेवी व कांग्रेस नेता रामनारायण परमार ने बताया की शहीद को श्रद्धांजलि देने गांव आएं पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्र कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने शहीद की स्मृति में गांव का नामकरण, मेले का आयोजन सहित कई घोषणाएं की थी, लेकिन यह घोषणाएं कहीं फाइलों में दबकर रह गई है। 11 साल में महज शहीद स्मारक का निर्माण किया गया वह भी वर्तमान में खस्ताहाल है।
लिखा जाएगा पत्र
यहां मामला मेरे सज्ञान में नहीं है यदि इस प्रकार का मामला है तो जानकारी लेकर वशिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा कर जो भी घोषणा हुई थी। वहां पूरी कराई जाएगी।
जमील ख़ान एसडीएम इछावर